- गर्मियों में मुर्गियों की मौत क्यों होती है?
- गर्मी में मुर्गियों की मौत: एक गंभीर समस्या
गर्मी में मुर्गियों की मृत्यु और कीमतों में वृद्धि के कारण: एक विस्तृत जानकारी।
परिचय
गर्मी के मौसम में मुर्गी पालन उद्योग को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। तापमान में वृद्धि के साथ ही मुर्गियों की मृत्यु दर में अचानक वृद्धि देखी जाती है, जिसका सीधा प्रभाव बाजार में चिकन की कीमतों पर पड़ता है। इस ब्लॉग पोस्ट में हम विस्तार से जानेंगे कि क्यों गर्मी में मुर्गियां मरने लगती हैं और कैसे यह घटना बाजार में चिकन की कीमतों में वृद्धि का कारण बनती है।
मुर्गियों पर गर्मी का प्रभाव
मुर्गियां 37-38 डिग्री सेंटीग्रेड के तापमान तक सहज रहती हैं, लेकिन इससे अधिक तापमान उनके लिए जानलेवा साबित हो सकता है । जब तापमान 40-42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है, तो मुर्गियों में निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न होने लगती हैं:
1. हीट स्ट्रोक (लू लगना): मुर्गियों के शरीर का तापमान नियंत्रण तंत्र विफल हो जाता है, जिससे उनकी मृत्यु हो सकती है ।
2. डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण): गर्मी में मुर्गियों के शरीर से अत्यधिक पानी निकल जाता है, जिससे वे कमजोर हो जाती हैं और मर सकती हैं ।
3. श्वसन संबंधी समस्याएं: गर्मी में मुर्गियों को सांस लेने में कठिनाई होती है क्योंकि उनके शरीर से अत्यधिक कार्बन डाइऑक्साइड निकलने लगती है ।
4. भोजन सेवन में कमी: मुर्गियां गर्मी में दाना कम खाती हैं, जिससे उनका पोषण स्तर गिर जाता है और प्रतिरक्षा प्रणाली कमजोर हो जाती है ।
5. अंडा उत्पादन में गिरावट: गर्मी के कारण अंडों का आकार छोटा हो जाता है, छिलका पतला हो जाता है और उत्पादन कम हो जाता है ।
मुर्गियों की मृत्यु के प्रमुख कारण
1. तापमान में अचानक वृद्धि: जब तापमान सामान्य से 3-4 डिग्री अधिक हो जाता है और यह वृद्धि अचानक होती है, तो मुर्गियों के शरीर को अनुकूलन का समय नहीं मिल पाता ।
2. अपर्याप्त वेंटिलेशन: मुर्गीशालाओं में हवा के प्रवाह की कमी से अंदर का तापमान खतरनाक स्तर तक पहुंच जाता है ।
3. पानी की कमी: गर्मी में मुर्गियों को अधिक पानी की आवश्यकता होती है। यदि पानी की आपूर्ति पर्याप्त नहीं है या पानी गर्म हो जाता है, तो मुर्गियां पीने से कतराती हैं ।
4. भीड़भाड़: मुर्गीशाला में मुर्गियों की संख्या अधिक होने से गर्मी और बढ़ जाती है ।
5. बीमारियों का प्रकोप: गर्मी के मौसम में संक्रामक रोगों का खतरा बढ़ जाता है, जो कमजोर मुर्गियों को आसानी से अपना शिकार बना लेते हैं ।
मुर्गियों की मृत्यु से कीमतों पर प्रभाव
जब गर्मी के कारण बड़ी संख्या में मुर्गियों की मृत्यु होती है, तो इसका सीधा प्रभाव बाजार में चिकन की आपूर्ति पर पड़ता है। आपूर्ति कम होने से कीमतों में वृद्धि होना स्वाभाविक है। उदाहरण के लिए, भारत में एक गर्मी की लहर के दौरान चिकन की कीमत 140 रुपये प्रति किलोग्राम से बढ़कर 180 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई थी ।
नेशनल एग को-ऑर्डिनेशन कमिटी के अनुसार, एक गर्मी के मौसम में लगभग 70 लाख मुर्गियों और चूजों की मृत्यु हो गई थी, जिससे उद्योग को लगभग 200 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ । तेलंगाना और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों में, जहां देश के अधिकांश पोल्ट्री फार्म स्थित हैं, नुकसान विशेष रूप से गंभीर था ।
मुर्गियों को गर्मी से बचाने के उपाय
1. वेंटिलेशन में सुधार: मुर्गीशाला में पर्याप्त हवा के प्रवाह की व्यवस्था करें। खिड़कियों पर जूट के बोरे लटकाएं और उन पर नियमित रूप से पानी का छिड़काव करें ।
2. छत का प्रबंधन: यदि छत टिन की है, तो उस पर सफेद रंग करवाएं या घास-फूस बिछाएं। इससे छत का तापमान 4 डिग्री तक कम हो सकता है ।
3. पानी का प्रबंधन: मुर्गियों को दिन में 2-3 बार ठंडा पानी दें। पानी में इलेक्ट्रोलाइट और विटामिन सी मिलाएं ।
4. भीड़ कम करना: गर्मी के मौसम में मुर्गियों की संख्या को 25-30% तक कम कर देना चाहिए ताकि उन्हें अधिक जगह मिल सके ।
5. खिलाने का समय: गर्मी में मुर्गियों को सुबह और शाम के समय ही दाना दें। दोपहर 11 बजे से शाम 4 बजे तक दाना न डालें ।
6. कूलिंग सिस्टम: यदि संभव हो तो पंखे, कूलिंग पैड या फॉगर सिस्टम लगाएं ।
7. छायादार पेड: मुर्गीशाला के आसपास छायादार पेड़ लगाएं जो गर्म हवाओं की तीव्रता को कम कर सकें ।
8. पर्दे और पानी का छिड़काव: मुर्गीशाला के चारों ओर टाट के पर्दे लगाएं और उन पर पानी का छिड़काव करें ।
बाजार में कीमतों को स्थिर रखने के उपाय
1. मांग और आपूर्ति का संतुलन: सरकार और उद्योग संघों को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो गर्मी के मौसम में मुर्गी पालकों को सहायता प्रदान करें और आपूर्ति श्रृंखला को स्थिर रखें।
2. भंडारण सुविधाओं में सुधार: बेहतर कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं विकसित करके मुर्गियों के मांस को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है।
3. जागरूकता अभियान मुर्गी पालकों को गर्मी में मुर्गियों की देखभाल के बारे में प्रशिक्षित करना चाहिए ताकि मृत्यु दर को कम किया जा सके।
4. बीमा योजनाएं: मुर्गी पालकों के लिए विशेष बीमा योजनाएं लागू की जानी चाहिए जो गर्मी के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई कर सकें।
निष्कर्ष
गर्मी के मौसम में मुर्गियों की मृत्यु दर में वृद्धि एक गंभीर समस्या है जिसका सीधा प्रभाव बाजार में चिकन की कीमतों पर पड़ता है। मुर्गियों को गर्मी से बचाने के लिए उचित प्रबंधन और देखभाल आवश्यक है। वेंटिलेशन, पानी की उचित व्यवस्था, छाया और कूलिंग सिस्टम जैसे उपायों को अपनाकर मुर्गियों को गर्मी के प्रकोप से बचाया जा सकता है। साथ ही, सरकार और उद्योग संघों को मिलकर ऐसी नीतियां बनानी चाहिए जो गर्मी के मौसम में मुर्गी पालकों की मदद कर सकें और बाजार में चिकन की कीमतों को स्थिर रख सकें। केवल सामूहिक प्रयासों से ही इस समस्या का स्थायी समाधान निकाला जा सकता है और मुर्गी पालन उद्योग को स्थिरता प्रदान की जा सकती है।

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